यू जमीन पर बैठकर क्यों आसमान देखता है अपने पंखों को खोल ये ज़माना सिर्फ उड़ान देखता है

यू जमीन पर बैठकर क्यों आसमान देखता है अपने पंखों को खोल ये ज़माना सिर्फ उड़ान देखता है

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तो जिंदा हो तुम

पिघले नीलम से बहता हुआ यह समा, नीली नीली सी खामोशियां, ना कहीं है जमीन, ना कहीं आसमां, सरसराती हुई तेहनियां ,पत्तियां कह रही है बस एक तुम हो यहां सिर्फ में हूं मेरी सांसे है और मेरी धड़कने ऐसी गहराइयां ऐसी तनहाइयां और मैं सिर्फ में,अपने होने पर मुझको यकीन आ गया।