एक बात होंठो तक है जो आई नहीं, बस आंखों से है झांकती, तुमसे कभी मुझसे कभी, कुछ लव्ज है वो मांगती जिनको पहन के होंठो तक आ जाए जो, आवाज की बाहों में बाहें डाल के इठलाए वह, लेकिन जो यह बात है एहसास ही एहसास है खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती, खुशबू जो बेआवाज है जिसका पता तुझको भी है जिसकी खबर मुझको भी है, दुनिया से भी छुपता नहीं है ये जाने कैसा एहसास है।
एक बात होंठो तक है जो आई नहीं, बस आंखों से है झांकती, तुमसे कभी मुझसे कभी, कुछ लव्ज है वो मांगती जिनको पहन के होंठो तक आ जाए जो, आवाज की बाहों में बाहें डाल के इठलाए वह, लेकिन जो यह बात है एहसास ही एहसास है खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती, खुशबू जो बेआवाज है जिसका पता तुझको भी है जिसकी खबर मुझको भी है, दुनिया से भी छुपता नहीं है ये जाने कैसा एहसास है।
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